




श्री ब्राह्मण संस्कृत महाविद्यालय के बारे में
संस्कृत शिक्षा में 77+ वर्षों की उत्कृष्टता

श्री ब्राह्मण संस्कृत महाविद्यालय की स्थापना विक्रमी सम्वत् 2004 माघ शुक्ला पंचमी (बसंत पंचमी) वार रविवार तद्नुसार 15 फरवरी 1948 को हुई। यह महाविद्यालय रामहृद तीर्थ के पावन भूमि पर स्थित है, जो भगवान परशुराम की कर्मस्थली एवं तपोभूमि है।
स्थापना तिथि
विक्रमी सम्वत्: विक्रमी सम्वत् 2004 माघ शुक्ला पंचमी (बसंत पंचमी)
ग्रेगोरियन: February 15, 1948
बसंत पंचमी (रविवार)
Excellence
हमारा विज़न, मिशन और उद्देश्य

विज़न
वैश्विक परिप्रेक्ष्य में संस्कृत शिक्षा की गरिमा की संस्थापना के लिए विश्वस्तरीय संस्था के रूप में विकास।

मिशन
आधुनिक पद्धतियों के माध्यम से संस्कृत ज्ञान की सभी शाखाओं का समग्र विकास, भाषाई विविधता और सांस्कृतिक बहुलता को बढ़ावा देना, साथ ही भारतीय ज्ञान परंपराओं की डिजिटल पहुंच सुनिश्चित करना।

उद्देश्य
संस्कृत की सभी शाखाओं में अनुसंधान और प्रोत्साहन, समान उद्देश्यों वाली संस्थाओं को संबद्ध करना, संस्कृत संवर्धन के लिए सरकारी नीतियों का कार्यान्वयन, और दुर्लभ पांडुलिपियों तथा भारतीय ज्ञान परंपराओं का संरक्षण।
समय के साथ हमारी यात्रा
ब्राह्मण सभा द्वारा स्थापना
महात्मा नेतराम जी ब्रह्मचारी द्वारा 15 फरवरी 1948 को शिलान्यास। तत्कालीन पंजाब (वर्तमान हरियाणा) के प्रत्येक ब्राह्मण परिवार से 1 रु. प्रति कुढी सामुदायिक योगदान।
औपचारिक पंजीकरण और पंजाब विश्वविद्यालय संबद्धता
अक्तूबर 1969 में संस्था को विधिवत पंजीकृत किया गया। संस्कृत शिक्षा के लिए पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ से संबद्ध।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय संबद्धता
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से संबद्ध। अनेक मेरिट धारक और विश्वविद्यालय टॉपर्स का निर्माण।
बुनियादी ढांचे का विकास
कंप्यूटर लैब, स्मार्ट क्लासरूम, योगशाला और नवकुण्डीय यज्ञशाला की स्थापना।
MVSU कैथल संबद्धता और NEP 2020
महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय, कैथल से संबद्ध। शास्त्री प्रतिष्ठा (B.A. Honours) कार्यक्रम के साथ NEP 2020 का कार्यान्वयन।
हमारे मूल मूल्य
सांस्कृतिक संरक्षण
भारतीय सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और संवर्धन
शैक्षणिक उत्कृष्टता
शिक्षा के उच्चतम मानकों के प्रति प्रतिबद्धता
समाज सेवा
शिक्षा और मूल्यों के माध्यम से समाज की सेवा
प्रामाणिकता
प्रामाणिक पारंपरिक ज्ञान को बनाए रखना
आध्यात्मिक विकास
आध्यात्मिक और नैतिक विकास को बढ़ावा देना
सर्वसुलभता
सभी के लिए शिक्षा को सुलभ बनाना
