श्री ब्राह्मण संस्कृत महाविद्यालय
संस्कृत शिक्षा और सांस्कृतिक धरोहर संस्थान - रामहृद तीर्थ के पावन भूमि पर स्थित
विद्या ददाति विनयं विनयाद् याति पात्रताम्। पात्रत्वात् धनमाप्नोति धनात् धर्मं ततः सुखम्॥
विद्या विनम्रता देती है, विनम्रता से योग्यता आती है, योग्यता से धन मिलता है, धन से धर्म और फिर सुख की प्राप्ति होती है।

भगवान परशुराम
विष्णु के छठे अवतार
भगवान परशुराम विष्णु के छठे अवतार हैं। वे त्रेता युग में ऋषि जमदग्नि और माता रेणुका के पुत्र थे। वे लोकतंत्र के प्रथम संस्थापक और अत्याचारी क्षत्रियों के संहारक के रूप में जाने जाते हैं।
पिता: महर्षि जमदग्नि
माता: रेणुका
तिथि: वैशाख शुक्ल तृतीया (अक्षय तृतीया)
स्थान: महेन्द्र पर्वत, मयदेश (इंदौर क्षेत्र)
परशुराम वेद, शास्त्र और अस्त्र-शस्त्र में निपुण थे। वे धर्म के रक्षक और अधर्म के नाशक थे। उन्होंने भीष्म, द्रोण और कर्ण जैसे महावीरों को शस्त्र विद्या सिखाई।
विस्तृत जानकारी देखें
आचार्य फूल कुमार शास्त्री
एम. ए. संस्कृत, हिन्दी, ज्योतिषाचार्य
पूर्व प्रधान एवं मुख्य संरक्षक
प्रधान का संदेश

श्री सुरेन्द्र दत्त गौतम
प्रधान
श्री ब्राह्मण संस्कृत महाविद्यालय, रामराय में आपका हार्दिक स्वागत है। हमारी संस्था भारतीय संस्कृति और वैदिक परंपराओं के संरक्षण एवं प्रसार के लिए समर्पित है। हम छात्रों को न केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता प्रदान करते हैं, बल्कि उन्हें संस्कारवान और चरित्रवान नागरिक बनाने का प्रयास करते हैं।
हमारा उद्देश्य प्राचीन ज्ञान को आधुनिक शिक्षा के साथ जोड़कर एक समग्र शिक्षा प्रणाली विकसित करना है। संस्कृत भाषा और वैदिक शास्त्रों का अध्ययन छात्रों को आत्मज्ञान और जीवन के गहरे अर्थों को समझने में सहायता करता है।
मैं सभी छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों को आश्वस्त करता हूं कि हम मिलकर इस संस्था को शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे। आइए, हम सब मिलकर भारतीय संस्कृति की इस अमूल्य धरोहर को आगे बढ़ाएं।
साहित्याचार्य का संदेश

श्री सुभाष चन्द्र शास्त्री
साहित्याचार्य
श्री ब्राह्मण संस्कृत महाविद्यालय, रामराय, हरियाणा में आपका स्वागत है। हमारी संस्था हरियाणा में संस्कृत शिक्षा के अग्रणी केंद्रों में से एक है और इसने कई अनुशासित, आत्मनिर्भर और जिम्मेदार छात्रों को तैयार किया है जो आज विभिन्न क्षेत्रों में राष्ट्र की सेवा कर रहे हैं।
संस्कृत शिक्षा के साथ-साथ, महाविद्यालय छात्रों के शैक्षणिक, शारीरिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास पर भी ध्यान केंद्रित करता है। कंप्यूटर और डिजिटल लर्निंग सुविधाओं के माध्यम से पारंपरिक शिक्षण को आधुनिक तकनीक से समर्थित किया जाता है। महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय के सहयोग से योग, कर्मकांड, ज्योतिष और शास्त्री के पाठ्यक्रम संचालित किए जाते हैं। हरियाणा बोर्ड के अंतर्गत 9वीं से 12वीं तक की कक्षाएं भी चलाई जाती हैं।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, C, C++, SQL और CHKCL में पाठ्यक्रम प्रदान किए जा रहे हैं, और भविष्य में वास्तु शास्त्र, योग थेरेपी, आचार्य और अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे। संस्था गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने और छात्रों को राष्ट्र के जिम्मेदार नागरिक बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
वर्षों की विरासत
नामांकित छात्र
पाठ्यक्रम उपलब्ध
संबद्ध
रामहृद तीर्थ - कुरुक्षेत्र का दक्षिणी द्वार
स्यमन्त पंचक तीर्थ - ब्रह्मा जी की उत्तर वेदी
रामहृद तीर्थ जींद से 8 किलोमीटर की दूरी पर पश्चिम में जींद-हांसी राजमार्ग पर गाँव रामराये में स्थित है। यहाँ पर भगवान परशुराम के पाँच कुण्ड हैं, जिनमें भगवान परशुराम ने प्रजातन्त्र व्यवस्था स्थापित करने में हुए मुक्ति युद्ध में हताहत हुए राजा महाराजाओं की मुक्ति के लिए तर्पण किया था।
कुरुक्षेत्र भूमि का दक्षिणी द्वार
महाभारत में वर्णित पवित्र कुरुक्षेत्र क्षेत्र की सीमाओं को चिह्नित करने वाले चार पवित्र द्वारों में से एक
भगवान कृष्ण ने यहाँ स्नान किया
द्वापर युग में सूर्य ग्रहण के अवसर पर भगवान श्री कृष्ण यादवों सहित द्वारिका पुरी से यहाँ स्नान के लिए आये
पांडवों ने यहाँ तर्पण किया
महाभारत युद्ध के बाद पाण्डव यहाँ भगवान परशुराम के तीर्थों में स्नान एवं तर्पण के लिए आए
ब्रह्मा जी की पाँच वेदियों में से एक
स्यमन्त पंचक ब्रह्मा की उत्तर वेदी है, प्रयाग, गया, पुष्कर और उज्जैन सहित पाँच पवित्र वेदियों में से एक
शास्त्रीय प्रमाण
महाभारत, वामन पुराण, श्रीमद्भागवत महापुराण और अन्य पवित्र ग्रंथों में उल्लेख
मासिक पूर्णिमा मेला
प्रत्येक पूर्णिमा को हजारों श्रद्धालु पवित्र कुण्डों में स्नान और अनुष्ठान के लिए आते हैं
शैक्षणिक कार्यक्रम
NEP 2020 अनुपालन के साथ पारंपरिक और आधुनिक शिक्षा का संयोजन
NEP 2020 अनुपालन के साथ संस्कृत में स्नातक डिग्री कार्यक्रम
शास्त्री प्रतिष्ठा (B.A. Honours) - NEP 2020
₹2,800/yearविशेषज्ञता: वेद, दर्शन, व्याकरण, ज्योतिष, साहित्य, धर्मशास्त्र
अवधि: 3-4 वर्ष
NEP 2020 निकास विकल्प
1 वर्ष → प्रमाणपत्र (इंटर्नशिप के साथ) | 2 वर्ष → डिप्लोमा (इंटर्नशिप के साथ) | 3 वर्ष → शास्त्री (B.A.) | 4 वर्ष → शास्त्री प्रतिष्ठा (B.A. Honours)
